लखनऊ: लखनऊ के SGPGI में नर्सिंग और हॉस्पिटल अटेंडेंट परीक्षा को रद्द कर दिया गया है ।अभ्यर्थियों ने एग्जाम में गड़बड़ी के आरोप लगाये, जिसके बाद इस प्रकरण की जांच STF को सौंप दी गई है।
एसजीपीजीआई नर्सिंग और हॉस्पिटल अटेंडेंट भर्ती के दूसरे चरण की परीक्षा सात परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों (शिफ्ट) में आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 8,500 उम्मीदवार शामिल हुए।
PGI प्रशासन का क्या कहना है?
PGI प्रशासन का कहना है कि पहली पाली की परीक्षा के दौरान कुछ केंद्रों पर तकनीकी खराबी आने के कारण, सभी केंद्रों की दोनों पालियों की परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा। संस्थान जल्द ही परीक्षा की नई तारीख की घोषणा करेगा।
इसकी जानकारी संबंधित उम्मीदवारों को समय रहते दे दी जाएगी। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे ताजा अपडेट और आगे की घोषणाओं के लिए संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट नियमित रूप से देखते रहें।
कानपुर में भी रद्द हुई थी परीक्षा
इससे पहले यूपी के कानपुर के श्यामनगर स्थित एमडी इन्फोटेक सेंटर पर बुधवार को BSF HCM समेत विभिन्न पदों के लिए आयोजित ऑनलाइन परीक्षा तकनीकी गड़बड़ी के चलते रद्द हुई थी। दरअसल परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद कई कंप्यूटर सिस्टम बंद हो गए थे। इससे अभ्यर्थी भड़क गए थे और उन्होंने सेंटर के बाहर जमकर हंगामा किया था।
केंद्र पर पहली, दूसरी और तीसरी तीनों पालियों में परीक्षा प्रस्तावित थी, लेकिन पहली पाली में ही तकनीकी समस्या आ गई थी। जिसके बाद पूरी परीक्षा रद्द हो गई थी।
यूजीसी नेट परीक्षा रद्द हुई थी
इससे पहले यूजीसी नेट परीक्षा रद्द होने पर देशभर में हंगामा हुआ था। इस मामले पर सपा नेता अखिलेश का बयान भी सामने आया था और उन्होंने कहा था, "और अब गड़बड़ी की ख़बर के बाद यूजसी- नेट की परीक्षा भी रद्द कर दी गयी। भाजपा के राज में पेपर माफ़िया लगभग हर परीक्षा में धांधली कर रहा है। यह देश के ख़िलाफ़ किसी की बड़ी साजिश भी हो सकती है। पुलिस में भर्ती की परीक्षा का पेपर लीक होगा तो कानून-व्यवस्था नहीं सुधरेगी जिससे देश-प्रदेश में अशांति और अस्थिरता बनी रहेगी। नीट की परीक्षा में घपला होगा तो ईमानदार लोग डॉक्टर नहीं बन पाएंगे और देश के लोगों के इलाज के लिए भविष्य में डॉक्टरों की कमी और बढ़ जाएगी तथा बेईमान लोग, जनता के जीवन के लिए खतरा बन जाएंगे। यूजीसी-नेट परीक्षा न होने से, शिक्षकों की कमी में और ज़्यादा इज़ाफ़ा होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी से देश के विकास में बाधा उत्पन्न होगी, जो कालांतर में बेहद घातक साबित होगी।"
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